Thursday, September 11, 2014

शादी का कार्ड wedding invitation

शादी का कार्ड -

हमारे दुलारे की शादी में जरूर आना

ढ़ेर सी मनुहार और आत्मीयता का रंग समेटे शादी का कार्ड

शादी के तैयारियों गहनों और कपड़ों की खरीददारी तो हो गयी, लेकिन, अभी तो सब मेहमान बुलाने है। उन्हें आमंत्रित करने का सलीका कुछ ऐसा हो कि वे बस मना नहीं कर पाए। आमंत्रण बस पाहुने के दिल को लुभाए, तो कैसा डिजाइन करे इंविटेशन कार्ड, क्या है दिलकश लेटेस्ट ट्रेंड्स, बता रही है आशिता दाधीच -

भुलेश्वर में वेडिंग कार्ड्स डिजाइन करने वाले भावेश भाई वगासिया के मुताबिक पिछले साल से अभी तक विटेंज कार्ड फैशन में चल रहे है। आज कल शादी के कार्ड में ग्लैमर के साथ सुनहरी रंगों की पट्टियां डिमांड में है। कुछ लोग सिल्वर और तांबाई रंगों को भी प्राथमिकता देते है। आज कल डबल फोल्डेड कार्ड चलन में है। देवताओं के चित्र वाला पोर्शन अलग और अलग से कागज पर छपा हुआ निमंत्रण पत्र अलग। ऐसे में इन्हे जॉइंट करने के लिए धागे का इस्तेमाल होता है, यहा धागा सुनहरी, चंदेरी से लेकर मोतियों की लड़ी के रूप में होता है, जो कार्ड को एलिगेंट लुक देता है।

इस साल भी शादी के कार्ड में पेस्टल शेड वाले मेटलिक रंगो की मांग है। श्रीजी स्टोर्स के प्रकाश मेहता के मुताबिक गहरा हरा, बेबी पिंक, आसमानी नीला, पीच कलर ही शादी के कार्ड के लिए उपयुक्त रहते है। कार्ड के बेकग्राउंड में यदि देवता या दुल्हा -दुल्हन के जोड़े और गुलाब का चित्र वाटर मार्क किया हो तो कार्ड की शोभा निखर कर सामने आती है। जहां तक फॉन्ट की बात है, लोग अब ऐसे फॉन्ट प्रिफर करते है जो हैण्ड राइटिंग की ही तरह दिखाई दे। इसके अलावा कार्ड में क्लासिक रोमन फॉन्ट हमेशा चलन में रहता है।

अगर शादी के कार्ड बनाने वाले आर्टिस्ट से कार्ड डिजाइन के अवधारणा को समझा जाए, तो यह कहा जा सकता है कि पहले से चली आ रही डिजाइन कुछ हेर फेर के साथ बाजार में दुबारा आ जाती है। आइये नजर डालते है ऐसे ही कुछ डिजाइन पर -

- सिंगल पेपर इंविटेशन - इन कार्डों में एक ओर वर वधु का परिचय, विवाह आयोजन स्थल, परिवार का नाम और अन्य विवरण होता है, जबकि पीछे का पेज पूरी तरह खाली, होता है, इस पर कुछ लोग दिलकश बेलबूटे की डिजाइन बनवाते है।

- डबल पेपर कार्ड - सदाबहार होते है इस तरह के कार्ड, लिफाफे में दो डिजाइनदार गत्तो के बीच दो कागजों को माला या धागे से जोड़ा जाता है। इन कार्ड्स में अधिक डीटेल लिखी जा सकती है। शादी की सभी रस्मों का ब्यौरा ड़ाला जा सकता है।

- शाही कार्ड - आज कल इनका चलन बढ़ रहा है। पाइप में रोल की तरह फोल्ड करके रखे हुए, सुनहरी कार्ड। ये कार्ड देखने में बिलकुल पुराने जमाने के राजाओं द्वारा जारी फरमानो की तरह दिखाई देते है। इनकी लागत कुछ अधिक है और रोलिंग लिफाफा होने के कारण इन्हे डाक से नहीं भेजा जा सकता। कुछ लोग इसी वजह से रोल की जगह डिबिया को महत्त्व देते है। डिबिया में गोल करके रखा हुआ रेशमी वेलवेट से लिखा हुआ निमंत्रण पत्र किस का दिल नहीं लुभाएगा!

- ई - इंविटेशन - आज कल के इस हाई टेक युग में सब कुछ ऑन लाइन हो गया है। ऐसे में टेक सेवी लोग मल्टी मीडिया इलेक्ट्रॉनिक कार्ड भेजते है। इंटरनेट से टेम्पलेट डाउनलोड करके इन्हे एडिट करते हुए मनमाना कार्ड बनाया जा सकता है। आप चाहे तो इसके साथ आवाज, चित्र, वीडियों, एनीमेशन जोड़ सकते है।

- इको फ्रेंडली कार्ड - आज कल हर कोई गो ग्रीन का नारा दे रहा है। ऐसे में शादी के कार्ड भी हैण्ड मेड पेपर से बनाए जाने लगे है। कई लोग ऐसे कार्ड प्रिफर करने लगे है, जिनमे कागज री साइकल किया जा सके। इन कार्ड के लिए पत्तियों, पंखो और पंखुड़ियों का इस्तेमाल होता है।



मनुहार पत्रिका भी है जरूरी -

जीवन में जिस तरह की व्यस्तता का आलम है, उसके चलते इन दिनों मनुहार पत्र यानी पूर्व-सूचना पत्र का चलन बढ़ गया है। ये कार्ड शादी तय होते ही भेजे जाते है। इन कार्ड में शादी का ब्यौरा और जरुर आने की विनम्र विनती होती है।



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विचित्र शादियां Weirds weddings

विचित्र शादियां

शादियों के रंग अनोखे

प्रांतो और राज्यों के साथ रंग बदलती शादियां

रंगीन शादी, अनोखे रीती रिवाज

राज्य अलग, रिवाज अलग

भारतीय हिन्दू शादियां रस्मों रिवाजों और संस्कारों का दमकता हुआ प्रतिबिंब है। हर प्रांत के खान -पान, भाषा, संस्कृति, जीवन शैली में अंतर होता है, वहीं अंतर शादियों के रिवाजों में भी झलकता है। यहां आशिता दाधीच बता रही है, राज्यों और उनकी शादियों के अनोखे रीति -रिवाजों के बारे में-

बंगाली शादी -

बंगाली विवाह समारोह देखने में एक दम सादा लेकिन पर्याप्त रूप से रोचक होता है। दुल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंचता है, तो उसका स्वगर फूलों से किया जाता है। दुल्हन के घर की सबसे ज्येष्ट महिला दुल्हे के ललाट पर आशीर्वाद स्वरुप 'बरन दला' लगाती है। दुल्हे पर गुलाब जल की वृष्टि की जाती है। दुल्हे और दुल्हन के शादी वाले दिन की पहली मुलाकात को 'शुभो दृष्टी' कहा जाता है। वर माला समारोह को 'माला बदल' कह कर संबोधित किया जाता है। जिसके बाद दुल्हन को उसके भाइयों उठाया जाता है। उठाने के लिए उसे 'पीड़ी' यानि एक छोटे से स्टूल पर बैठाया जाता है। भाई अपनी बहन को लेकर दुल्हे के इर्द - गिर्द सात फेरे लगाते है। जिसके बाद होती है सम्प्रदान और सप्तपदी की रस्म।

आसमिया शादी -

शादी से पहले दुल्हे और दुल्हन की मां निकटवर्ती नदी पर जाकर वहां से पानी का घड़ा भर कर लाती है। इस पानी से वर वधु को स्नान करवाया जाता है। आसमिया जोड़े की शादी का भोज उनकी शादी से पहले होता है। दुल्हे की बारात तो तब तक दुल्हन के घर में प्रवेश नहीं मिलता है जब तक वह काफी सारी धनराशि उपहार में नहीं देता। मंत्रोच्चार के मध्य दुल्हा अपनी भावी पत्नी के ललाट पर सिंदूर लगाता है। जिसके बाद आरती के साथ विवाह संपन्न होता है।

ओड़िया शादी -

इन शादियों में अन्य सभी रीति रिवाज तो भारतीय शादी जैसे ही होते है, लेकिन, जो बात ओड़िया शादी को सबसे अलग बनाती है वह है, शादी में दुल्हे की मां भाग नहीं लेती है। इन शादियों में सप्तपदी और फेरों को 'हाथा घंटी' कह कर संबोधित किया जाता है।

दक्षिण भारत -

पहले रस्म को 'काशी यात्रा' कहा जाता हैं। यह रस्म शादी के पहले होती हैं। दूल्हा पूजा करता हैं और फिर कहता हैं की शादी करने के बजाय वह काशी जाना चाहता हैं और अपना जीवन भगवान को समर्पित करना चाहता हैं। हाथ में छाता लेकर और लकड़ी के चप्पल पहनकर वह घर से निकलता हैं। दुल्हन के पिता और भाई दुल्हे को रोकने और मनाने की कोशिश करते हैं। दूसरा रस्म को 'स्नाताकुम' या 'धागे की रस्म' कहा जाता हैं। इस रस्म में दुल्हे की पूजा होती हैं।

कश्मीरी पंडित -

इन शादियों में सबसे जरूरी है दुल्हन के कान छिदाई की रस्म। साथ ही, इनमे सुहाग की निशानी 'देजहोर' पहनना बहुत जरूरी होता है, जो सोने की चैन और लटकन से बना होता है। इसे कान में ऊपर की तरफ पहना जाता है। शादी की अन्य रस्मों के नाम लिवून, वान्वुन, मान्ज़िरात, बरियाँ, थाल्स, पूलन का गहना, संज़रू, और देव्गों है.

पंजाबी शादी-

शादी से दो दिन पहले चुंग की रस्म होती है जिसमें दूल्हा और सात सुहागनें मिलकर चक्की पीसते हैं और फिर प्रसाद बांटा जाता है। इसके अगले दिन घडौली की रस्म होती है जिसमें लडकी और लडके की बुआ, मामी, मौसी अपने-अपने घर मटकों को सजाकर बैठते हैं और दूसरे पक्ष से बहन और जीजा इनसे मोलभाव कर मटके खरीदकर लाते हैं।

गुजराती शादी -

गुजराती शादी में फेरों के समय दूल्हा-दुल्हन को मौली की बनी एक ही माला पहनाई जाती है जो दोनों के जीवन को एक सूत्र में पिरोने का प्रतीक होता है। कन्यादान के समय सास द्वारा दूल्हे की नाक और विदाई के समय दूल्हा सास का पल्लू पकडता है।

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दुल्हन की बारात Weird Wedding

शादियां जिनमें है महिलाओं का बोलबाला

फिल्म मेरे ब्रदर की दुल्हनका पोस्टर तो आपको याद ही होगा जिसमें अभिनेत्री कैटरीना बारात लेकर घोड़ी पर चढ़कर शादी के लिए निकलती है। यह कोरी फिल्मी कल्पना नहीं, हकीकत है देश के कई अंचलों की। आशिता दाधीच बता रही है, देश की उन शादियों के बारे में जहां महिलाएं होती हैं प्रधान। आइए, जानते है, जनजातियों की इन अजीबो-गरीब शादियों के बारे में।


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- दुल्हन की बारात - यूपी के अल्लीपुर टंडवा इलाकों में दुल्हन घोड़ी चढ़, बारात लेकर ससुराल जाती है। दूल्हे के दरवाजे पर द्वारपूजन होता है व आंगन में मंडप सजता है और शादी की सारी रस्में निभाई जाती हैं। शादी के दिन दुल्हन परिवार और नाते-रिश्तेदारों के साथ बारात लेकर ससुराल जाती है। दूल्हे के आंगन में ही खंभ पूजन कर मंडप सजाया जाता है। जनवासे से दुल्हन अपने परिवार के साथ मंडप में जाती है और फिर वहीं अग्नि को साक्षी मान दूल्हे के साथ सात फेरे लेती है। पैर पूजन, कन्या दान जैसी रस्मों के बाद वह सास-ननद के बीच रहती है और अगले दिन सुबह दूल्हे के घर पर ही कलेवा होता है। शाम को दुल्हन के ससुरालजन उसे मायके के लिए विदा करते हैं। अगले दिन दूल्हा अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ ससुराल जाता है। अगले दिन दुल्हन को ससुराल विदा करा ले जाते हैं।

उत्तराखंड के जौनसार बावर में भी शादी की रस्में निराली हैं। यहां वर के बजाए वधु घर से बारात लेकर जाती है अपने भावी पति के घर रहने के लिए। वधु के साथ आए बाराती स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ नाचते गाते हुए वर के गांव से कुछ दूर ठहर जाते हैं। वहां सत्कार के बाद शाम को दावत होती है। इसके बाद रात भर नाच-गाना चलता है, जिसे स्थानीय बोली में गायण कहते हैं। दूसरे दिन वर पक्ष के आंगन में हारुल, झेंता, रासो व जगाबाजी जैसे लोकगीत और नृत्यों का आयोजन होता है। बारात विदा करने के बाद दुल्हन तीन या पांच दिन ससुराल में रह कर वापस मायके आती है।

बंगाल और असम के ममनसिंह, ग्वालपाडा और कामरुप जिलों में रहने वाले गारो आदिवासीयों में वधु पक्ष उसी लड़के को चुनता है जिसने गले में खोपड़ियों की माला पहनी हो और जो बहुत ही भयानक दिखता हो।

दुल्हे की भरी जाती है मांग

छत्तीसगढ़ के ओरांव जनजाति की शादियों में दुल्हन भी दूल्हे की मांग भरती है। विवाह के लिए वर पक्ष बारात लेकर जाता है। मंडप में दुल्हा दुल्हन को हल्दी लगाने के बाद दुल्हा दुल्हन की मांग में सिन्दूर भरता है। इसके बाद कोल्हू से निकला सरसों का तेल दूल्हे की मांग पर लगाया जाता है। उसके बाद तीन बार उसकी मांग दुल्हन द्वारा भरी जाती है। पहली बार मांग भरने के बाद उसे पोंछ दिया जाता है और इसके बाद दूसरी बार मांग भरी जाती है। फिर वधू पक्ष दूल्हे को नौ रुपए देता है। यह सुखदान या कन्या के परिवार का दुल्हे को दिया गया आशीर्वाद कहलाता है।

अब भी होता है स्वयंवर

गुजरात में गोलग-घेडों के मुताबिक होली पर स्वयंवर होता है। जिसमे खंभे के ऊपर गुड़ और नारियल बांधते है जिसके इर्द-गिर्द सारी लडकियां नृत्य करती हैं। पुरुष भी उनके चारों ओर घेरा बनाकर नाचना शुरू करते है। महिलाएं अपने पीछे नाच रहे पुरुषों को पत्थर फेंक कर, झाड़ू मार कर दूर भगाती है। जो युवक इस महिला घेरे को तोड़कर खंभे में गुड और नारियल निकाल लाता है। उसे विजेता माना जाता है, यह विजेता अब इस घेरे की किसी भी महिला से विवाह कर सकता है।

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सोलह श्रृंगार। Wedding make up

किसी भी स्त्री को पूर्णता देता है, सोलह श्रृंगार। सोलह श्रृंगार करने के बाद स्त्री की खूबसूरती में चार चांद लग जाते है। शादी जिंदगी का सबसे यादगार दिन है, ऐसे में हर कोई इस दिन लगना चाहता है बेहद खास। हर दुल्हन करना चाहती है पिया के नाम पर सोलह श्रृंगार। आज आशिता दाधीच, बता रही है, सोलह श्रृंगार के नाम और प्रकार -

- बिंदी- सुहागिन स्त्रियां कुमकुम या सिंदूर से अपने ललाट पर लाल बिंदी लगाना जरूरी समझती हैं। इसे परिवार की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

- सिंदूर- उत्तर भारत में सिंदूर को स्त्रियों का सुहाग चिन्ह माना जाता है और विवाह के मौके पर पति अपनी पत्नी के मांग में सिंदूर भर कर जीवन भर उसका साथ निभाने का वचन देता है।

- मेहंदी- शादी के वक्त दुल्हन और शादी में शामिल होने वाली परिवार की सुहागिन स्त्रियां अपने पैरों और हाथों में मेहंदी रचाती है। मान्यता के मुताबिक वधू के हाथों में मेहंदी जितनी गाढ़ी रचती है, उसका पति उसे उतना ही प्यार करता है।

- शादी का जोड़ा- दुल्हन को जरी से बना हुआ शादी का लाल जोड़ा पहनाया जाता है। जिसमे घाघरा, चोली और ओढ़नी का समावेश होता है। देश के कुछ अंचलों में दुल्हन को पीली साड़ी पहनाई जाती है, महाराष्ट्र में हरी, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र में लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनाई जाती है।

- फूलों की वेणी - दुल्हन के जूड़े में जब तक सुगंधित फूल लगाए जाए उसका श्रृंगार फीका लगता है। दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में तो महिलाएं रोज फूलों का गजरा लगाती है, जबकि उत्तर भारत में फेरों के दौरान महिलाएं ढ़ीली वेणी गूंथ कर उसमे फूल पहनती है।

- मांग टीका- यह सर के बीच में पहना जाने वाला यह स्वर्ण आभूषण होता है। दुल्हन की मांग में इसी जगह सिंदूर भरा जाता है।

- नथनी - उत्तर भारतीय स्त्रियां आमतौर पर नाक के बायीं, जबकि दक्षिण भारत में नाक के दोनों ओर छोटी-सी नोज रिंग पहनी जाती है, जिसे बुलाक कहा जाता है। सुहागिन स्त्रियों के लिए नाक में आभूषण पहनना अनिर्वाय माना जाता है। इसलिए आम तौर पर स्त्रियां नाक में छोटी नोजपिन पहनती हैं, जो देखने में लौंग की आकार का होता है।

- कान की बालियां - शादी के दौरान कान में पहने वाले आभूषण को चेन के सहारे जुड़े में बांधा जाता है। शादी के बाद भी स्त्रियों का कानों में ईयरिंग्स पहनना जरूरी माना जाता है।

- हार- गले में पहना जाने वाला सोने या मोतियों का हार पति के प्रति सुहागन स्त्री के सुहाग का प्रतीक माना जाता है। दक्षिण और पश्चिम भारत में दुल्हा शादी के दौरान वधू के गले में मंगल सूत्र (काले रंग की बारीक मोतियों का हार जो सोने की चैन में गुंथा होता है) पहनाता है।

- बाजूबंद- यह आभूषण सोने या चांदी का होता है। यह बाहों में पूरी तरह कसा जाता है। इसलिए इसे बाजूबंद कहा जाता है। पहले सुहागिन स्त्रियों को हमेशा बाजूबंद पहने रहना अनिवार्य माना जाता था

- चूड़ियां- चूड़ियों में रंगों का विशेष महत्व है। नवविवाहिता के हाथों में लाल या हरी चूड़ियां ही पहनाई जाती है. इसके अलावा पीली या बंसती रंग की चूड़ियां पहनी जाती है।

- अंगूठी- शादी के पहले सगाई के रस्म में वर-वधू एक-दूसरे को अंगूठी पहनाते है. अंगूठी स्त्री के श्रृंगार की प्रतिक है. अंगूठी पहनने से हाथ की शोभा बढ़ जाती है.

- कमरबंद- कमरबंद कमर में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसे स्त्रियां विवाह के बाद पहनती हैं. सोने या चांदी से बने इस आभूषण के साथ बारीक घुंघरुओं वाली आकर्षक की रिंग लगी होती है, इसके अलावा सोने के भी कमरबंध खासे प्रचलित है.

- बिछुड़ी - पैरों के अंगूठे में रिंग की तरह पहने जाने वाले इस आभूषण को बिछुड़ी कहा जाता है। पैरों के अंगूठे और छोटी अंगुली को छोड़कर बीच की तीन अंगुलियों में चांदी का विछुआ पहना जाता है। इस आभूषण में तरह-तरह की सुंदर आकृतियां, जैसे मछली, मोर, तितली, फूल, पत्तियां आदि बनी होती हैं।

- पायल- पैरों में पहने जाने वाले आभूषण को पायल कहते है। इसमें घुंघरू लगे होते है। यह आभूषण हमेशा सिर्फ चांदी का ही होता है। पायल पहनने से जब स्त्री चलती है, तो उसके पैरों से आने वाली रुनझुन की आवाज से घर का माहौल मधुर लगता है।



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खरीदारी Wedding shopping

मेहंदी है रचने वाली

शादी के तारीख है नजदीक, अभी से जुट जाओ तैयारी में

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शादी की तारीख तय होते ही, परिवार वाले जुट जाते है खरीदारी और तैयारियों में। समारोह में हर किसी के आकर्षण का केंद्र हो दुल्हन होती है, ऐसे में उसे भी तो जन्नत की हूर लगना है। विवाह समारोह में अपनी दिलकश अदाओं का जलवा बिखेरने के लिए दुल्हन को भी चार -पांच महीने पहले तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। कैसे करे दुल्हन पहले से खूबसूरती को निखारने की ये तैयारियां, बता रही है आशिता दाधीच।

शादी के तारीख तय होते ही दुल्हन को भरपूर आराम करना चाहिए। सुबह उठकर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना चाहिए। त्वचा पर अच्छी तरह मॉयस्चराइजर लगाएं ताकि ब्राइडल मेकअप से पहले स्कीन तैयार हो सके। पर्याप्त पानी व जूस पिएं। इससे त्वचा में निखार आता है, और नेचुरल ग्लो किसी भी मेकअप से बढ़ कर और बेहतर होता है। यह कहना है ग्रांट रोड़ इलाके में ब्यूटी केयर चेन चलाने वाली फाल्गुनी संघानी का। उनके मुताबिक दुल्हन को एक नियमित अंतराल पर ऑक्सीफेशियल स्किन ट्रीटमेंट लेना चाहिए। यह ऑक्सीफेशियल एक तरह का फेशियल ट्रीटमेंट है, जिसमें त्वचा में ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है और त्वचा की गंदगी को साफ किया जाता है। इससे बेजान कोशिकाओं में जान आ जाती है और त्वचा ताजी दिखने लगती है। नियमित अंतराल पर त्वचा पर कुछ देर बर्फ के टुकड़े जरुर रगड़े, इससे स्कीन साफ और चमकदार रहती है। चेहरे की सफाई, अरोमा थेरेपी फेशियल, बॉडी व सिर का मसाज और हेयर स्पा के साथ मेनिक्योर और पेडिक्योर जरुर कराते रहे।

इन दिनों हर जगह प्री ब्राइडल पैकेज की व्यवस्था हैं। ऐसे में एक ही जगह बुकिंग करवा कर आप वहा से रेग्युलर ट्रीटमेंट ले सकती है. इससे ब्यूटी केयर एक्सपर्ट भी आपकी स्कीन के नेचर को समझने लगेगी और आपको किसी भी तरह की स्कीन एलर्जी से बचाया जा सकेगा। अंधेरी में पार्लर चेन चला रही अनु चौहान के मुताबिक दुल्हन को कम से कम दो महीने पहले बॉडी वैक्स करवाना चाहिए। बॉडी वैक्स में लिंब्स और पीठ के अलावा बिकनी वैक्स भी होता है।

नहाने के पानी में गुलाब की कुछ पत्तियां डालें। रेग्युलर हेड मसाज लें और हफ्ते में एक बार मैनीक्योर और पैडीक्योर अवश्य करवाएं। शादी के दिन हर कोई फिट लगना चाहता है ऐसे में शादी से कम से कम दो तीन महीने पहले जिम ज्वाइन करें। दिन में एक बार योग जरुर करे। कैलौरी कॉन्शियस रहें और घी- चिकनाई वाली चीजें, मिर्च मसाले, मिठाई, चाय कॉफी आदि से परहेज रखें। डाइट में प्रोटीन जैसे दही, दूध, पनीर आदि रोजाना नियमित रूप से लें।

ब्राइडल मैग्जीन के लिए मेकअप आर्टिस्ट गौरव अरोड़ा के मुताबिक शादी से एक पखवाड़े पहले ही दुल्हन को आईलैश एक्सटेंशन करवा लेना चाहिए। इसके तहत पलकों पर एक-एक लैश चिपकाई जाती है जिससे पलकें घनी व लंबी दिखाई देती हैं। ये पलकें लगभग 15 दिनों तक टिकी रहती है। इससे भावी दुल्हन रोज मेक अप करने के झंझट से बच सकती है। भावी दुल्हन को परमानेंट मेकअप करवा लेना चाहिए। यह मेकअप दो से चार महीने तक अपना प्रभाव बनाए रखता है। बार-बार मेकअप करने की जरूरत नहीं पड़ती। प्राकृतिक बालों के ऊपर फॉल्स हेयर लगाने को हेयर एक्सटेंशन कहते है। इससे बाल घने और बड़े लगते है। बालों को घना दिखाने के लिए हेयर फाइबर तकनीक का इस्तमाल करना चाहिए।

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हनीमून Honeymoon

ये हसीन वादियां, ये खुला आसमान



शादी के बाद का सबसे खास लम्हा होता है, हनीमून पर बिताए गए पल। किसी खास स्थान पर बिताए गए प्यार के अंतरंग लम्हे किसी भी जोडे के लिए अविस्मरणीय होते हैं। ऐसे में शादी के साथ ही शुरू होती है, हनीमून की प्लानिंग। यहां आशिता दाधीच बता रही हैं, देश और दुनिया के सबसे खूबसूरत हनीमून स्पॉट के बारे में।

- सिंगापुर

हनीमून के दिनों को यादगार बनाने के लिए सिंगापुर केबल कार में स्काई डाइविंग प्रोग्राम में खुद को रजिस्टर कराएं। सेंटोसा आइलैंड के सुंदर रेतीले समुद्रतट तथा तरह-तरह के वाटर स्पो‌र्ट्स और स्पा ट्रीटमेंट पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। चाइना टाउन में चाइनीज हैंडीक्राफ्ट, घडि़यां, कपड़े, सी फूड, चाइना वेयर आदि की बहुत वैरायटी मिलेगी। अगर वाइल्ड लाइफ की एक झलक रात को देखनी हो तो नाइट सफारी का आनंद लें। यहां 110 अजीबोगरीब प्रजातियों के 1200 जानवर दिखते हैं।

- थाईलैंड

आसमान छूती इमारतें लक्जरी होटल व शॉपिंग मॉल इस शहर की शोभा हैं। ऐतिहासिक बौद्ध मंदिरों के अलावा पटाया बीच थाईलैंड का मुख्य आकर्षण है। सेलिंग, विन्डसर्फिग, वाटर स्कीइंग, केबिल स्का, पैरासेलिंग, स्नोर्केलिंग आदि एडवेंचर स्पो‌र्ट्स के लिए यह आदर्श बीच है। थाईलैंड गए है तो फुकेत जरुर जाए, यहां के सफेद रेत वाले बीच बसबस ही अपनी और खींचते है।

- यूरोप

स्विट्जरलैंड में एल्प्स बर्फीली पहाड़ियां चोटियां देखने का अपना अलग मजा है। स्कीइंग व गोल्फिंग के लिए यह देश बहुत अच्छा है। पेरिस में विश्वप्रसिद्ध आयफिल टॉवर के अलावा शाजेलिजे, लूव्र, साक्रे कुअर, आर्क द ट्रायम्फ जैसे कुछ बेहतरीन दर्शनीय स्थल है। लंदन के मशहूर दर्शनीय स्थलों में बिग बेग, वेस्टमिंस्टर एवे, बकिंघम पैलेस, सेंट पॉल कैथेड्रल और टॉवर ऑफ लंदन हैं। इटली के वेनिस, रोम, पीसा, फ्लोरेंस अपनी सुंदरता के कारण सभी को लुभाते है।

- मलेशिया

मीलों तक समुद्रतट फैले है और उनके किनारे पाम के पेड़, सागर से आती लहरें और दूर तक दिखता नीला पानी व आकाश हैं। यहां बहुत से रेन फॉरेस्ट हैं, जिनमें सफारी ट्रिप आयोजित किए जाते हैं।

- मॉरिशस

हनीमूनर्स पैराडाइज कहलाने वाले मॉरिशस में समुद्री जीव-जंतुओं को बहुत करीब से देखने का मौका मिलेगा और वॉटर एडवेंचर स्पो‌र्ट्स की भी पूरी सुविधा है।

- ताज महल, आगरा

आगरा ताजमहल के लिए जाना जाता है। ताज महल की गितनी विश्व के सात अजूबों में होती है। इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में करवाया था। यहीं मुमताज महल का मकबरा भी है। पास ही यमुना नदी बहती है।

- खजुराहो

खजुराहो मंदिर मध्‍यप्रदेश की शान है। वास्‍तुकला का अद्भुत नमूना यहां देखने को मिलता है। खजुराहो मंदिर में कामुक मूर्तियां लगी हुई है जो कामदेव को समर्पित है।

- श्रीनगर

ये शहर झीलों और हाऊसबोट के लिए जाना जाता है। डल झील पर कई खूबसूरत नावों पर तैरते घर हैं जिन्हें हाउसबोट या शिकारा कहा जाता है। मुगल गार्डन, शालीमार बाग, निशात बाग जैसे कई बड़े गार्डन है।

- गोवा

गोवा अपनी नाइट लाइफ के लिए ही जाना जाता है, ऐसे में यहां हनीमून के पल बिताना बेहद रोचक पल रहेगा। गोवा के खूबसूरत और शानदार समुद्री-तटों की लंबी लिस्ट में कैलेंगुट बीच, अंजुना बीच, बागा बीच, बागाटोर बीच, सिंकेरियन बीच, पालोलेम बीच और मीरामार बीच प्रमुख हैं। जिनमे आप वाटर गेम्स और रिवर क्रूज का लुत्फ़ उठा सकते हैं।

- केरल

कोवलम व कोडई कनाल जाकर समुद्रतट पर फैले नारियल के पेड़, ताजे फलों के ढेर और प्राकृतिक सौंदर्य देखा जा सकता है। यहां की मन्नार की खाड़ी धरती पर स्वर्ग सा एहसास देती है।

- हिमाचल प्रदेश

बर्फ से ढकी सफेद चोटियां, मीलों तक फैले फूलों से ढके हरे-भरे बागान, सेबों से लदे पेड़ हिमाचल प्रदेश की खासियत है। कुल्लू, मनाली, शिमला, कसौली आदि यहां की कुछ खास जगहें हैं। यहां के पहाड़ों व दर्रो में ट्रेकिंग, रॉक क्लाइंबिंग जैसे एडवेंचर स्पो‌र्ट्स का लुत्फ भी उठाया जा सकता है।

- राजस्थान

रेतीली मिट्टी के लिए प्रसिद्ध राजस्थान देशी-विदेशी हनीमूनर्स की पसंदीदा जगह है। झीलों का शहर कहलाने वाला उदयपुर बेहद खूबसूरत है। जैसलमेर के रेतीले टीलों पर डेजर्ट सफारी का आनंद ले सकते हैं। माउंट आबू अरावली की पहाडि़यों से घिरा एक बहुत लोकप्रिय हनीमून स्पॉट है। रणथंभौर व भरतपुर में बाघ व बर्ड सैंक्च्युरी का आनंद ले सकते हैं।

 

शादियों के गीत, Wedding songs

शादियों के गीत, जिनके बिना अधूरी है शादियां

वे फिल्मे गाने जो बन गए शादियों की पहचान

संगीत के बिना हर जश्न अधूरा है, ऐसे में शादियों में तो संगीत और नाचने गाने का अपना ही महत्त्व है। शादी शब्द सुनते ही ना सिर्फ लेडीज संगीत बल्कि बरात के आगे झूम झूम कर नाचते लोगों की तस्वीर घूम जाती है। कब कब सजती है संगीत की यह महफिल और कौनसे होते है गीत बता रही है आशिता दाधीच।

शादियों में गीत संगीत की शुरुआत होती है गणपति स्थापना के साथ। गणेश स्थापना के दौरान कुछ गीत व भजन सभी समाजों और वर्गों में गाए जाते है। इनमें चालो रे विनायक आपा जोशी जी रे चाला, देवा हो देवा, गणपति राखों मेरी लाज, रनत भंवर से उतरो आज आदि शामिल हैं।

इसके बाद दूसरी बड़ी रस्म होती है मेहंदी की। पहले इस रस्म के दौरान घर की बड़ी -बुजुर्ग महिलाएं आपस में मिल जुल कर हंसी -ठिठौली करती थी। आधुनिक युग के साथ बन्ने-बन्नी के गीत की जगह इस रस्म में डीजे पर बजने वाले फिल्मी गीतों का बोलबाला हो गया है। रस्म के दौरान मेहंदी है रचने वाली, बन्नो रानी तुझे सयानी, मेहंदी से लिख के जैसे पॉप्युलर और पैपी गाने बजने लगे है।

इसके बाद नंबर आता है महिला संगीत का, जो पूरी तरह से नाच गाने पर ही आधारित कार्यक्रम होता है. यह कार्यक्रम विवाह समारोह का मुख्य आकर्षण होता है। इस दौरान जहां सहेलियां अलग अलग तरह के गीत चुनकर अपनी भावी दुल्हन सहेली को मंगलकामना देती है तो वही वरिष्ठ और ज्येष्ठ महिलाएं अपने डांस से कोई ना कोई सीख दुल्हन को दे जाती है. इस दौरान जहां भविष्य की मंगलकामना होती है तो वही हंसी ठिठौली भी और रिश्तेदारों से परिचय का भी जरिया है यह रस्म। इस समारोह में हर कोई संगीत की धुनों पर मस्ती में झूमता-गाता है, फिर चाहे वह समधी-समधन हो या फिर दूल्हा-दुल्हन।

जब दूल्हा बारात लेकर निकलता है तो हर कोई बस थम जाता है, दुल्हन के इस सौभाग्य की एक झलक देखने के लिए। बारात के आगे नाचते दूल्हे के दोस्त, झूमती भाभियां और दीदीयां बारात की शान होती है। बारात में बजने वाले गीतों में प्यारा भैया मेरा और आज मेरे यार की शादी है सबसे प्रमुख है।

बारात के दुल्हन के घर पहुंचने पर होता है जम कर स्वागत और मान मनुहार। इस दौरान दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है गीत खास डिमांड में रहता है। शादी की मुख्य रस्म फेरों में यूं तो मंत्रोच्चार की ध्वनि गुंजायमान रहती है, लेकिन, इसके साथ रिश्तेदार मग्न रहते है सदाबहार गीतों पर डांस करने में। इन गीतों में शामिल है राजा की आयेगी बारात रंगीली होगी रात मगन मै नाचूंगी, बहारो फूल बरसाओं मेरा महबूब आया है, दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है, मैं तो भूल चली बाबुल का देश पिया का घर प्यारा लगे, मेरी प्यारी बहनियां बनेगी दुल्हनियां जैसे गीत शामिल है। इस तरह किसी भी दुल्हन की विदाई मोहम्मद रफ़ी के गाए वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म नीलकमल के बेहद मार्मिक गीत था बाबुल की दुआये लेती जा तुझको सुखी संसार मिलेके बिना आज भी लगभग अधूरी सी लगती है।

 

 

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मेहंदी Nail Art

तेरी मेहंदी वो देखेंगे तो.………........


अपना दिल रख देंगे, चुपके से तेरे पैरों

मैं हूं खुश रंग हिना.. प्यारी खुश रंग हिना!

शादियां मतलब सजना संवरना, रूप निखारना और भीड़ से बिलकुल अलग दिखना। ऐसे में जब महिलाओं के श्रृंगार की बात हो, तो मेहंदी का जिक्र होना लाजिमी हो जाता है। मान्यता है कि जिसकी मेहंदी जितना रंग लाती है, उसे पति से उतना ही प्यार मिलता है। मेहंदी लड़की की सुंदरता में भी चार चांद लगाती हैं। आजकल मेहंदी हाथ और पैर ही नहीं बल्कि पीठ, बाजूबंद यहां तक कि नाभि पर भी लगवाती हैं। यहां आशिता दाधीच बता रही है कुछ ट्रेंडी डिजाइनर मेहंदी के बारे में।

मेहंदी की कुछ मशहूर शैलीयां

कलरफुल मेहंदी

कलरफुल मेहंदी के लोकप्रिय होने का कारण है इसका स्टाइलिश -कलरफुल होना। आप कपड़ों और जूलरी के मुताबिक अपने हाथों पर मैच करते रंगों से मेहंदी का डिजाइन बनवा सकती हैं। डिजाइन के ऊपर शेडिंग का चलन भी जोरों पर है।

मारवाड़ी मेहंदी

ये डिजाइंस बहुत बारीक, नजदीक और घने होते हैं। इसकी डिजाइंस में शहनाई, ढोलक, बैंडबाजे, मोर, पक्षी जैसी कलाकृतियां शामिल हैं।

टैटू मेहंदी

लड़कियों में बाजुओं, पेट और पीठ पर स्माल फिगर्स जैसे रंगबिरंगी तितली, एंजिल फेस, डंक मारते बिच्छु, ड्रैगन आदि टैटू बनवाने का चलन काफी है।

जरदोजी मेहंदी

जरदोजी मेहंदी सिल्वर या गोल्डन शेड लिए होती है। मेहंदी रचे हाथों में सिल्वर या गोल्डन ग्लिटर से डिजाइन बनाया जाता है। मेहंदी पर आप रंग-बिरंगे स्टोन या कुंदन भी लगवा सकती हैं।

गहनों वाली मेहंदी

इसमें मेहंदी के साथ क्रिस्टल, कुंदन, स्वरोस्की, नग, स्पार्कल डस्ट, कलर्स, सितारे, मोतियों और फर आदि जूलरी का इस्तेमाल किया जाता है।

अरेबियन मेहंदी

मोटे-मोटे फूल-पत्तियों वाले डिजाइन हमेशा ही दुल्हन और उसकी सखियों को खासा लुभाते है, इससे हाथ भरा भरा नजर आता है।

बॉम्बे मेहंदी

इसमें ताजमहल, लाल किला, मकबरा, पेंटिंग वगैरह में हुई बारीक नक्काशी ट्रेंड में है। मेहंदी लगाने के बाद दूसरे दिन गोल्डन और सिल्वर ग्लिटर से मिक्स एंड मैच करवा लेती हैं।




 

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लहंगा Wedding dress

ये मेरा लहंगा बड़ा है महंगा



शादी के दिन हर दुल्हन का अरमान होता है कि वो हो सबसे जुदा। दुल्हन के श्रृंगार से लेकर उसका लाल जोड़ा, हर किसी के आकर्षण का केंद्र होता है। दुल्हन की ये पोशाक उसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती है। यहां आशिता दाधीच बता रही है कैसे करे दुल्हन के घाघरे और लहंगे की खरीदारी, क्या है लेटेस्ट ट्रेंड्स और फैशन।

लहंगा दुल्हन की पारिवारिक परंपराओं के अनुकूल होता है। अक्सर दुल्हनें भी अपने घर की रस्मों के मुताबिक ही गहनें और कपड़ें पहनना पसंद करती है। उत्तर भारतीय शादियों में अक्‍सर दुल्‍हने लाल रंग के जोडे में और दक्षिण भारतीय शादियों में सफेद रंग से सजती है, यह कहना है, कॉस्ट्यूम डिजाइनर श्रद्धा जोशी का। जोशी के मुताबिक लड़कियां लाल कम और पिंक, मैजेंटा, बैगनी, नीला या फिर नारंगी रंग अधिक पसंद करती हैं। उनके मुताबिक घाघरा पसंद करते समय कांप्लैक्शन का ध्यान रखना जरूरी हैं। दुल्हन यदि गोरी है तो पिंक, फिरोजी, हरा, लाल, सिल्वर या गोल्डन किसी भी रंग को आजमा सकती हैं। यदि गेहुंएं रंग की है तो उस पर रूबी, लाल, ऑरेंज, नेवी ब्ल्यू, फिरोजी और नीला कलर ज्यादा अच्छे लगेंगे, गोल्ड बेस वर्क के साथ मैरून, मैट गोल्ड वर्क के साथ एमेराल्ड ग्रीन या कॉपर के शेड्स अच्छे लगते हैं। सांवली रंगत वालों को ब्राइट कलर में पीला, नारंगी, लाल एवं नीले रंग में अपना लहंगा तैयार करवाना चाहिए।

> फिश कट लहंगा और ए-लाइन घाघरा खूब पसंद किए जा रहे हैं।

> लहंगा में मिरर, गोटा एवं पर्ल वर्क फैशन में हैं।

> कुंदन वर्क एवं सितारा वर्क भी करवाया जा सकता हैं।

> लाइट वेट फैब्रिक आपको एलिगेंट और ग्लैमर लुक देता हैं।

> डेलिकेट इब्रॉयडरी, लैक वर्क, पैच वर्क या इंट्रिकेट बीड वर्क भी लहंगे को बेहतर दिखाता हैं।

ब्राइडल ड्रेस डिजाइनर नीता शेट्टी के मुताबिक इन दिनों लहंगों की जगह ले ली है स्लीम स्कर्ट्‌स ने। इन दिनों साड़ी गाउन' भी काफी चलन में है। दुल्हन का लुक इन दिनों वेस्टर्न फैशन से भी काफी हद तक प्रभावित है। इसके चलते दुल्हनें प्री स्ट्रिच्ड लहंगा पसंद करने लगी हैं। हैवी लुक चाहती है तो विक्टोरियन गाउन सेलेक्ट करे। लहंगे पर जरी, दबका,गोटा, लेस व ऐंटीक मैचिंग वर्क का फैशन है।




 

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निकाह Muslim Wedding

तू मुझे कबूल, मैं तुझे कबूल

आपसी वादों और समझौतों पर टिकी है निकाह की बुनियाद



??जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं, और जमीन पर उन्हें मिलती है मुकम्मल मंजिल। फिर चाहे फेरे लेकर, यस आई डू कहकर या हिजाब से कबूल हैं बुदबुदा कर। बेहद खूबसरत रस्म है निकाह, और इनमे चार चांद लगाती हैं रवायतें, यहां आशिता दाधीच बता रही हैं, निकाह के रस्मों - रिवाज के बारे में।

ईस्तीखरा - यह निकाह की सबसे पहली रस्म है। इसमें समुदाय के प्रमुख लोग खुदा से निकाह के लिए सहमति मांगते हैं। दूल्हे और दुल्हन के सुखी वैवाहिक जीवन के लिए दुआ मांगते हैं।

ईमाम जामीन - इस रस्म के लिए दूल्हे की मां दुल्हन के घर मिठाइयां, सोने या चांदी का सिक्का लेकर जाती है। ये सिक्का सिल्क के कपड़े में लपेट कर दुल्हन के परिवार को दे दिया जाता है।

मंगनी - मंगनी में दूल्हा और दुल्हन आपस में अंगूठियां बदलते हैं। दोनों परिवार आपस में उपहार, फल, सूखे मेवे, मिठाइयां देते लेते हैं।

हल्दी पीठी रस्म - यह रस्म कुछ कुछ हिंदू शादियों की हल्दी की रस्म की तरह ही होती है। इसमें दुल्हन को पीले रंग के कपड़े पहनाए जाते हैं। परिवार के लोग दुल्हन के चेहरे और शरीर पर हल्दी लगाते हैं। इस रस्म के बाद दुल्हन घर से तब तक बाहर नहीं निकल सकती, जब तक उसका निकाह ना हो जाए।

मेहंदी - इसमें दुल्हन के हाथ और पैरों पर मेहंदी लगाई जाती है।

शगुन का जोड़ा- यह रस्म भी हिन्दू रस्मों की ही तरह होती हैं। दूल्हे के परिवार से दुल्हन के लिए कपड़े और गहने भेजे जाते हैं, जिन्हे दुल्हन निकाह के दौरान पहनती है।

बारात के लिए रिसेप्शन- इस रस्म में जब दूल्हे की बारात दुल्हन के घर आती है, तब रिशेप्शन दिया जाता है।

निकाह- यह मुख्य फंक्शन है, जिसके बाद ही दूल्हे और दुल्हन को शौहर और बीबी माना जाता है।

क्या होती है निकाह की प्रक्रिया-

निकाह के दौरान दूल्हा और दुल्हन अलग-अलग बैठते हैं। इस समय वे दोनों एक-दूसरे को देख नहीं पाते। इस दौरान मेहर तय किया जाता है। मेहर वह रकम है, जो शादी के बाद दूल्हे द्वारा दुल्हन को दी जाती है। यह नकद दी जाए, जरूरी नहीं। दुल्हन तैयार हो तो दूल्हा इसे बाद में कभी भी देने का वादा कर सकता है। काजी निकाह की प्रक्रिया पूरी करवाता है। काजी, वकील और दो गवाहों की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी होती है। वकील बारी_बारी से दूल्हा और दुल्हन से इस शादी में उसकी रजामंदी पूछता है। दोनों से यह तीन_तीन बार पूछा जाता है। दोनों लोग परस्पर जब कहते हैं कि उन्हें यह निकाह कुबूल है, तो लोग दोनों को शादी की मुबारकबाद देते हैं और निकाह की सबसे खास रस्म पूरी होती है।


मुंह दिखाई- शादी के बाद जब दूल्हा और दुल्हन, एक-दूसरे को पहली बार देखते हैं तो उसे मुंह दिखाई कहा जाता है। इस रस्म को निभाने के लिए दूल्हा और दुल्हन के बीच में कांच (दर्पण) और कुरान को रखा जाता है। दर्पण द्वारा दूल्हा और दुल्हन एक-दूसरे के दीदार करते हैं।

रुखसत (बिदाई)- हिंदू शादियों की तरह ही ठाट -बाठ से लाड़ली बिटियां इस रस्म के साथ अपने बाबुल के घर से विदा होती हैं। जब दुल्हन अपने ससुराल पहुंचती है, तब सास, ननदों द्वारा उसका स्वागत होता है।

दावत-ए-वलीमा- जब दुल्हन, दूल्हे के घर पहुंचती है तो वहां जलसा मनाया जाता है, जिसमें दावत दी जाती है। इसे रिसेप्शन भी कहा जाता है।

पगफेरा - दुल्हन के परिवार की ओर से तब रिशेप्शन रखा जाता है, जब दुल्हन पहली बार ससुराल से अपने माता-पिता के घर आती है। इस दौरान दुल्हन को उपहार दिए जाते हैं।



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ईसाई शादियां Christian Wedding

यस आई विल कहकर जुड़ें दो दिल

गोवा की क्रिश्चियन शादियां होती है सबसे अलहदा

सफेद रंग से रंगीन होती ईसाई शादियां



फिल्मों में सफेद गाउन में लिपटी, फूलों से सजी दुल्हन को देख कर ना जाने कितने दिल धड़क उठते हैं। ये अनोखे रीती रिवाज और सुरीले गीत पहचान है ईसाई शादियों की। ईसाई शादियां जहां बेहद सोबर होती है, वहीं इनका हर समारोह सादगी से मनाया जाता हैं, विस्तार से बता रही है आशिता दाधीच।

ईसाई रीती रिवाज से शादी करने के लिए दोनों पक्षों का ईसाई होना आवश्यक माना गया हैं। समुदाय में विवाह करने के लिए वर या वधु पक्ष में से किसी एक को शहर के पादरी या जाती -मंत्री को लिखित नोटिस देना पड़ता हैं। इसमें दोनों पक्षों के नाम, पते और व्यवसाय का उल्लेख होता हैं। इसके साथ उस चर्च का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है जहां विवाह संपादित होगा।

इसके बाद चर्च में इस शादी की सूचना देता हुआ एक नोटिस विवाह से चार दिन पहले चिपका दिया जाता हैं। वधु के माता और पिता से इस विवाह के संदर्भ में सहमति ली जाती हैं। जिसके बाद एक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इस प्रमाण पत्र के जारी होने के दो महीनों के भीतर विवाह किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ती हैं।

कैसा होता है विवाह समारोह -

विवाह का समारोह चर्च में मौजूद रजिस्टर में दर्ज किया जाता हैं। इसके साथ ही दो गवाहों, जाती मंत्री और नव विवाहित जोड़े की मौजूदगी में विवाह प्रमाण पत्र पर दस्तखत करके विवाह घोषित किया जाता हैं। क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद विवाह पूरी तरह कानूनी हो जाता हैं।

समारोह होता है शानदार -

शादी का मुख्य समारोह संगीत के साथ शुरू होता हैं। दोनों पक्ष संगीत की मधुर ध्वनि के साथ चर्च में प्रवेश करते हैं। जिसके बाद उन्हें 'वर्ड ऑफ गेटरिंग' दी जाती हैं, यह एक तरह का स्वागत समारोह हैं। जिसके बाद चर्च और फादर द्वारा आगंतुकों का स्वागत किया जाता हैं। दूल्हे और दुल्हन के लिए परमपिता परेमश्वर से आशीर्वाद मांगा जाता हैं। उनकी खुशियों की कामना की जाती हैं, इसके बाद मिनिस्टर द्वारा भगवान की विस्तृत प्रार्थना की जाती हैं।

इसके साथ ही, पवित्र ग्रंथ बाइबल से उद्धत की गई उत्तम पंक्तियां दूल्हे और दुल्हन के रिश्तेदारों और दोस्तों द्वारा गाई जाती हैं, इसके माध्यम से उनके लिए शुभकामना प्रेषित होती है। इसके बाद बाईबल से लिए गए प्रेरक प्रसंग सुनाए जाते हैं जिससे भावी पति -पत्नी प्रेरणा ले सके और उनका भविष्य सुंदर बने।

कसमों वादों का सिलसिला

मिनिस्टर दूल्हे और दुल्हन के इरादों और विवाह संस्था की पवित्रता के बारे में कसमें दिलवाता हैं। वह दूल्हे से पत्नी में विश्वास रखने और उसे सम्मान देने की बात कहता हैं, जिसके बदले में दूल्हा 'आई विल' कह कर अपनी सहमति देता हैं। इसके बाद मिनिस्टर दुल्हन से पति को सम्मान और प्रेम देने के साथ उसमें विश्वास रख कर विवाह की पवित्रता को बनाए रखने की सहमति मांगता हैं। 'आई विल' कहकर दुल्हन अपनी सहमति जताती हैं। इसके बाद मिनिस्टर परिजनों से विवाह के लिए सहमति मांगता हैं, वी डू कहकर अभिभावक इस महा मिलन के लिए सहमति देते हैं। शादी में आए मित्र गण भी यस वी डू कहकर पति पत्नी के इस नवनिर्मित रिश्ते को बनाए रखने में अपना सदैव सहयोग देने का वचन देते हैं।

वचनों का है ये बंधन

दुल्हन का दायां हाथ अपने दाएं हाथ में लेकर दूल्हा विवाह का वचन लेता हैं। 'मैं तुम्हे अपनी पत्नी मानता हूं और आजीवन सुख दुःख में तुम्हे प्रेम करने और तुम्हारे प्रति वफादार रहने का वचन देता हूं, कुछ ऐसी होती है दूल्हे राजा की शपथ। दुल्हनियां भी विधाता और मित्रों को साक्षी मानकर प्रेम, ईमानदारी और विश्वास के साथ सुख दुःख में अपने हमसफर का साथ निभाने का वादा करती हैं।

बदली अंगूठी, जुड़ें दिल

दुल्हन की अंगूठी मंत्री को दी जाती हैं, वह इसे दूल्हे को देता हैं। जिसे दुल्हा दुल्हन को पहनाता हैं। इस अंगूठी को प्रेम और समर्पण का टोकन माना जाता हैं। इसी तरह दुल्हन भी दूल्हे को रिंग पहनाती हैं। जिसके बाद होती हैं वेडिंग प्रेयर जिसे मिनिस्टर अंजाम देता हैं। इसके बाद मिनिस्टर इन दोनों को पति पत्नी घोषित कर देता हैं।

ईसा मसीह से नव दंपति के लिए आशीर्वाद मांग कर उन्हें प्रेम और विश्वास से एक दुसरे के साथ रहने की शुभकामना दी जाती हैं। इसके बाद मिनिस्टर दूल्हे को दुल्हन को चूमने के लिए कहता हैं, जिसके साथ विवाह पूर्ण माना जाता हैं।




 
 
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वेडिंग प्लॉनर Wedding planer

?शादियां तो होती रहेंगी और लोग उनपर करोड़ों खर्च करते रहेंगे।यह यश राज प्रॉडक्शन की फिल्म बैंड बाजा बारात की एक लाइन नहीं, बल्कि समाज की हकीकत है, जहां आज कल धूमधाम से शादियों का चलन बढ़ गया हैं। इसी के साथ जरुरत पड़ती हैं वेडिंग प्लॉनर की जो प्लान कर सके एक यादगार शादी। आशिता दाधीच बता रही हैं कि कैसे प्लान करें यादगार वेडिंग।



शादी ऐसा समारोह है जिसकी तैयारियां दो-तीन दिनों में पूरी नहीं हो सकती। इसके लिए शादी तय होते ही तैयारियों में जुट जाना चाहिए। आपको विवाह के समय होने वाले सभी कार्यक्रमों की योजना बनानी होगी। साथ ही इसमें हो रहे खर्च का भी ध्यान रखना होगा। इसके अलावा शादियों में जरूरी सेवा देने वालों से भी संपर्क रखें जैसे गाड़ी, म्यूजिशियन, फोटोग्राफर, पार्टी सप्लाई कंपनी।

कैसे करें शुरुआत?

जिस भी परिवार में विवाह तय हुआ है सबसे पहले परिवार के साथ मिलकर तय करें कि शादी की तैयारियां खुद करेंगे या वेडिंग प्लॉनर बुक करेंगे। शादी में कितना खर्च करना है, इसके लिए बजट बना लें। उसी हिसाब से व्यवस्थाएं करें। सगाई, शादी और रिसेप्शन के लिए स्थान की बुकिंग करा लें। इसके बाद कैटरर, डीजे, बैंड, फोटोग्राफर, विडियोग्राफर, फ्लोरिस्ट की लिस्ट तैयार कर ले, अपने बजट के हिसाब से किसी एक को चुन कर तय कर लें।

कपड़ों का चुनाव जरुरी

मार्केट के लेटेस्ट ट्रेंड्स पर गौर करें। संभव हो तो किसी ब्यूटीशियन और डिजाइनर से बात करके अपने डील-डौल के मुताबिक कपड़ों और गहनों का चुनाव शुरू कर दें। बाजार के चक्कर लगा कर अपने मन -मुताबिक शादी का जोड़ा और शादी के बाद के कपडे चुनना शुरू कर दें।

चलती रहे हनीमून प्लानिंग

किसी भी कपल की जिंदगी का सबसे यादगार लम्हा होता है हनीमून। इसके लिए यदि विदेश जाना हो तो पासपोर्ट -वीजा के लिए अप्लाई कर दें। जिस माहौल में जाना हैं उस मुताबिक कपड़ें खरीदें। हनीमून डेस्टिनेशन भी तय कर लें, ताकि सुविधानुसार उसकी बुकिंग करा सकें। शादी किस मौसम में हो रही है, तैयारी करते समय इसका ध्यान रखें। हनीमून डेस्टिनेशन के मौसम को भी ध्यान में रखें।

जरूरी है मेहमाननवाजी भी

शादी से कम से कम तीन महीने पहले ही मेहमानों और रिश्तेदारों की सूची तैयार कर लें। इसके बाद उन्हें दिए जाने वाले गिफ्ट्स की सूची तैयार करें और बजट के अनुसार खरीदारी शुरू कर दें। निमंत्रण पत्रों का डिजाइन पसंद करके प्रिंटिंग का ऑर्डर दे दें।

स्कीमों पर भी दे ध्यान

आए-दिन नए नए छूट और मुफ्त गिफ्ट्स की योजनाएं आती रहती हैं। फिर चाहे वेडिंग ड्रेस हो, मेहमानों को दिए जाने वाले तोहफे या दुल्हन के उपहार हो, उन्हें इन डिस्कांउट योजनाओं के तहत खरीदेंगे तो ब्राइडल वेयर के अलावा जूलरी और अन्य एक्सेसरीज आपकी जेब पर बड़ा बोझ नहीं डालेंगी।

चेहरे से चमके नूर

भावी दूल्हा या दुल्हन यदि हेयर स्टाइल चेंज करना चाहे तो शादी से तीन महीने पहले ही करवा ले, ताकि ऐन मौके पर विचित्रता ना झलके। ब्यूटी ट्रीटमेंट भी शुरू कर लें। जो भी एक्सेसरीज खरीदी जा रही हों, उन्हें एक बार पहनकर जरूर देख लें। अपनी हेयर स्टाइलिस्ट व ब्यूटीशियन से भी मदद लें। ब्यूटीशियन और मेहंदी वाले कई बार समय पर नहीं मिल पाते, इसी समय से इनकी बुकिंग कर लें। योग, ध्यान व व्यायाम के लिए समय निकालें। डांस की रिहर्सल कर लें।



 

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निमंत्रण पत्र Wedding card

शादी दो परिवारों का मिलाप। दो परिवारों के लिए एक साथ इकट्ठा होने का मौका। चिर-परिचित, जाने और अनजाने रिश्तेदारों से मिलने का स्वर्ण अवसर। उन्हें बुलाने के लिए जरूरी है दिल को छूने वाली मनुहार और प्रेम भरा आमंत्रण। इन्हीं आमंत्रण पत्रों को देख कर लुभाता है रिश्तेदारों का मन। कैसे हो विवाह के आमंत्रण पत्र बता रही है आशिता दाधीच।

नए दौर के इन निमंत्रण पत्रों में केवल आयोजनों के मैटर पर ही ध्यान नहीं दिया जाता है, बल्कि इसके साथ ही कार्ड के पैटर्न व रंगों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि आज जहां एल्बम व किताबनुमा निमंत्रण-पत्रों का चलन है, वहीं इस होड़ में मिनी कार्डों के रूप में निमंत्रण पत्रों का अपना ही स्थान है।

सोने व चांदी

पारंपरिक लक्ष्मी, गणेश की तस्वीरों वाले कार्ड हमेशा चलन में रहते हैं। इनमें कुछ नया करने के लिए निमंत्रण-पत्रों पर लक्ष्मी-गणेश के सोने व चांदी के सिक्के भी लगा दिए जाते है। कार्ड को आकर्षक बनाने के लिए इसमें सोने व चांदी की जरी लगाकर खूबसूरत बनाया जाता है। इसमें पारम्परिक नक्काशी की डिजाइन भी बनाई जा सकती है।

पीपल व केले के पत्तों के आकार वाले, पत्तल की बनावट वाले, गुलाब के फूल के आकार की कटिंग वाले कार्ड भी खासे चलन में है। इसी के साथ ही निमंत्रण-पत्रों में लाल, नारंगी, पीले व हरे रंग के कार्ड पेपर का प्रयोग इन्हें मनमोहक बनाता है। आजकल लोग सगाई, संगीत, मेहंदी और शादी के समारोह के लिए अलग-अलग निमंत्रण-पत्र छपवाना पसंद करते हैं।

आजकल निमंत्रण-पत्र डिजाइन करने के लिए अच्छी क्वालिटी के हैंडमेड पेपर के अलावा इंपोर्टेड और मटैलिक पेपर का भी इस्तेमाल किया जाता है। निमंत्रण-पत्र को सजाने के लिए आर्टीफिशियल डायमंड, सीक्वेंस, जरी, रेशम आदि का इस्तेमाल किया जाता है। कार्ड की पैकिंग इस तरह की जाती है कि मिठाई या चॉकलेट का डिब्बा उसी के साथ अटैच्ड होता है। इस तरह के शादी के एक कार्ड की छपाई का खर्च 100 से 1000 रुपये तक या इससे अधिक भी आता है।

चार पेज तक के कार्ड

कई वेडिंग कार्ड दो से चार पेज तक के भी होते है। इनमें विवाह के सभी दिनों के सभी आयोजनों की विस्तृत जानकारी के साथ पीहर, ससुराल, ममेरा और अन्य पक्षों समेत कुल परिवार के सभी बच्चों का नाम होता है। आज कल लोग निमंत्रण-पत्र में दूल्हा-दुल्हन की छोटी फोटोग्राफ भी छापने लगे हैं।

द्वापर युग की याद दिलाते कार्ड

आपने महाभारत जैसे सीरियलों में चिट्ठियां देखी होगी, आज कल उसी पैटर्न में रेशमी कपड़ें पर चमकीले रंगों में निमंत्रण का ब्यौरा लिखा जाता है, इन कार्ड्स में कोई इनवेलप नहीं होता है। इसे एक छोटे से चमकीले प्लास्टिक या लकड़ी के डंडे पर रोल करके रेशम की डोरी या लच्छे से से लपेटा जाता है। अब इन्हें छोटी-सी रंगीन गोलाकार लंबी पन्नी या फिर गोल या चोकोर बॉक्स में पैक कर रिश्तेदारों को भेजा जाता है।

हाई टेक कार्ड

इंटरनेट युग में जहां ई-मेल की सुविधा चारों ओर हो चुकी है, वहीं शादी के कार्ड का स्वरूप भी बदलता नजर आ रहा है, लड़के-लड़कियां अपने शादी कार्ड को ई-मेल द्वारा भी अपने मित्रों, परिचित लोगों तक पहुंचाते है। निमंत्रण-पत्र की जगह विवाह में आमंत्रण की सीडी व डीवीडी तैयार की जाती है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन व उनके परिवार के सदस्यों की जानकारी तथा विवाह के आयोजनों का सिलसिलेवार ब्यौरा होता है।




 

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थीम Wedding Theme

शादी एक ऐसा मौका है जिसे हर इंसान यादगार बनाना चाहता है और लोगों की इसी हसरत ने थीम आधारित विवाह की शुरुआत की। हाल ही के दिनों में लोगों में थीम आधारित शादियों के प्रति रुझान दिखाई पड़ रहा है। यहां आशिता दाधीच बता रही हैं उच्च मध्य वर्ग और मध्य वर्ग में शादियों को लेकर नई-नई थीम के चलन के बारे में:

रजवाड़ा थीम-

दूल्हा-दुल्हन राजसी ठाठ-बाठ के साथ आते हैं और उनकी जयमाला होती है। इस थीम में दुल्हन की सखियों के रूप में कुछ लड़कियां हाथ में फूल पत्तियां बिखेरती हुई आती हैं। दुल्हन पालकी में आती है। वहीं दूल्हे के आगे कुछ लोग हाथ में मशाल लेकर नगाड़े की धुन के बीच चलते हुए आते हैं। म्यूजिक की धुन भी कुछ इसी तर्ज पर बजाई जाती है और जयमाला होती है।

सांवरिया थीम -

सांवरिया फिल्म आधारित इस थीम में चांद तारे सजाए जाते हैं जिनके बीच से दुल्हन आती है। सजावट भी नीले और सफेद फैब्रिक और रंगीन फूलों से की जाती है ताकि रूमानी माहौल बनाया जा सके। हर थीम में जरूरत के मुताबिक फूलों, फैब्रिक एवं अन्य सामान के साथ सजावट की जाती है।

स्काई लाइट थीम -

इसमें स्काई लाइट लैंप जलाकर बारात के स्वागत के दौरान हवा में छोड़ा जाता है ताकि शादी वाले गार्डन या रिजॉर्ट के ऊपर खुबसूरत सजीव जगमगाता हुआ नजारा बन सके।

स्टेज पर किताब वाली थीम -

पढ़ाकू लोग इस थीम को खासा पसंद करते है। इसमें किताब के दोनों पन्नों पर एक रोमांटिक प्रस्तुति के साथ खुलते हुए पन्नों के बीच में से दूल्हा दुल्हन निकलते हुए दिखाई देते हैं। वरमाला के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल करके दूल्हा-दुल्हन को सतह से कुछ ऊंचा उठाकर वरमाला कराई जाती है।



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