यस आई विल कहकर जुड़ें दो दिल
गोवा की क्रिश्चियन शादियां होती है सबसे अलहदा
सफेद रंग से रंगीन होती ईसाई शादियां
फिल्मों में सफेद गाउन में लिपटी, फूलों से सजी दुल्हन को देख कर ना जाने कितने दिल धड़क उठते हैं। ये अनोखे रीती रिवाज और सुरीले गीत पहचान है ईसाई शादियों की। ईसाई शादियां जहां बेहद सोबर होती है, वहीं इनका हर समारोह सादगी से मनाया जाता हैं, विस्तार से बता रही है आशिता दाधीच।
ईसाई रीती रिवाज से शादी करने के लिए दोनों पक्षों का ईसाई होना आवश्यक माना गया हैं। समुदाय में विवाह करने के लिए वर या वधु पक्ष में से किसी एक को शहर के पादरी या जाती -मंत्री को लिखित नोटिस देना पड़ता हैं। इसमें दोनों पक्षों के नाम, पते और व्यवसाय का उल्लेख होता हैं। इसके साथ उस चर्च का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है जहां विवाह संपादित होगा।
इसके बाद चर्च में इस शादी की सूचना देता हुआ एक नोटिस विवाह से चार दिन पहले चिपका दिया जाता हैं। वधु के माता और पिता से इस विवाह के संदर्भ में सहमति ली जाती हैं। जिसके बाद एक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इस प्रमाण पत्र के जारी होने के दो महीनों के भीतर विवाह किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ती हैं।
कैसा होता है विवाह समारोह -
विवाह का समारोह चर्च में मौजूद रजिस्टर में दर्ज किया जाता हैं। इसके साथ ही दो गवाहों, जाती मंत्री और नव विवाहित जोड़े की मौजूदगी में विवाह प्रमाण पत्र पर दस्तखत करके विवाह घोषित किया जाता हैं। क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद विवाह पूरी तरह कानूनी हो जाता हैं।
समारोह होता है शानदार -
शादी का मुख्य समारोह संगीत के साथ शुरू होता हैं। दोनों पक्ष संगीत की मधुर ध्वनि के साथ चर्च में प्रवेश करते हैं। जिसके बाद उन्हें 'वर्ड ऑफ गेटरिंग' दी जाती हैं, यह एक तरह का स्वागत समारोह हैं। जिसके बाद चर्च और फादर द्वारा आगंतुकों का स्वागत किया जाता हैं। दूल्हे और दुल्हन के लिए परमपिता परेमश्वर से आशीर्वाद मांगा जाता हैं। उनकी खुशियों की कामना की जाती हैं, इसके बाद मिनिस्टर द्वारा भगवान की विस्तृत प्रार्थना की जाती हैं।
इसके साथ ही, पवित्र ग्रंथ बाइबल से उद्धत की गई उत्तम पंक्तियां दूल्हे और दुल्हन के रिश्तेदारों और दोस्तों द्वारा गाई जाती हैं, इसके माध्यम से उनके लिए शुभकामना प्रेषित होती है। इसके बाद बाईबल से लिए गए प्रेरक प्रसंग सुनाए जाते हैं जिससे भावी पति -पत्नी प्रेरणा ले सके और उनका भविष्य सुंदर बने।
कसमों वादों का सिलसिला
मिनिस्टर दूल्हे और दुल्हन के इरादों और विवाह संस्था की पवित्रता के बारे में कसमें दिलवाता हैं। वह दूल्हे से पत्नी में विश्वास रखने और उसे सम्मान देने की बात कहता हैं, जिसके बदले में दूल्हा 'आई विल' कह कर अपनी सहमति देता हैं। इसके बाद मिनिस्टर दुल्हन से पति को सम्मान और प्रेम देने के साथ उसमें विश्वास रख कर विवाह की पवित्रता को बनाए रखने की सहमति मांगता हैं। 'आई विल' कहकर दुल्हन अपनी सहमति जताती हैं। इसके बाद मिनिस्टर परिजनों से विवाह के लिए सहमति मांगता हैं, वी डू कहकर अभिभावक इस महा मिलन के लिए सहमति देते हैं। शादी में आए मित्र गण भी यस वी डू कहकर पति पत्नी के इस नवनिर्मित रिश्ते को बनाए रखने में अपना सदैव सहयोग देने का वचन देते हैं।
वचनों का है ये बंधन
दुल्हन का दायां हाथ अपने दाएं हाथ में लेकर दूल्हा विवाह का वचन लेता हैं। 'मैं तुम्हे अपनी पत्नी मानता हूं और आजीवन सुख दुःख में तुम्हे प्रेम करने और तुम्हारे प्रति वफादार रहने का वचन देता हूं, कुछ ऐसी होती है दूल्हे राजा की शपथ। दुल्हनियां भी विधाता और मित्रों को साक्षी मानकर प्रेम, ईमानदारी और विश्वास के साथ सुख दुःख में अपने हमसफर का साथ निभाने का वादा करती हैं।
बदली अंगूठी, जुड़ें दिल
दुल्हन की अंगूठी मंत्री को दी जाती हैं, वह इसे दूल्हे को देता हैं। जिसे दुल्हा दुल्हन को पहनाता हैं। इस अंगूठी को प्रेम और समर्पण का टोकन माना जाता हैं। इसी तरह दुल्हन भी दूल्हे को रिंग पहनाती हैं। जिसके बाद होती हैं वेडिंग प्रेयर जिसे मिनिस्टर अंजाम देता हैं। इसके बाद मिनिस्टर इन दोनों को पति पत्नी घोषित कर देता हैं।
ईसा मसीह से नव दंपति के लिए आशीर्वाद मांग कर उन्हें प्रेम और विश्वास से एक दुसरे के साथ रहने की शुभकामना दी जाती हैं। इसके बाद मिनिस्टर दूल्हे को दुल्हन को चूमने के लिए कहता हैं, जिसके साथ विवाह पूर्ण माना जाता हैं।
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गोवा की क्रिश्चियन शादियां होती है सबसे अलहदा
सफेद रंग से रंगीन होती ईसाई शादियां
फिल्मों में सफेद गाउन में लिपटी, फूलों से सजी दुल्हन को देख कर ना जाने कितने दिल धड़क उठते हैं। ये अनोखे रीती रिवाज और सुरीले गीत पहचान है ईसाई शादियों की। ईसाई शादियां जहां बेहद सोबर होती है, वहीं इनका हर समारोह सादगी से मनाया जाता हैं, विस्तार से बता रही है आशिता दाधीच।
ईसाई रीती रिवाज से शादी करने के लिए दोनों पक्षों का ईसाई होना आवश्यक माना गया हैं। समुदाय में विवाह करने के लिए वर या वधु पक्ष में से किसी एक को शहर के पादरी या जाती -मंत्री को लिखित नोटिस देना पड़ता हैं। इसमें दोनों पक्षों के नाम, पते और व्यवसाय का उल्लेख होता हैं। इसके साथ उस चर्च का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है जहां विवाह संपादित होगा।
इसके बाद चर्च में इस शादी की सूचना देता हुआ एक नोटिस विवाह से चार दिन पहले चिपका दिया जाता हैं। वधु के माता और पिता से इस विवाह के संदर्भ में सहमति ली जाती हैं। जिसके बाद एक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इस प्रमाण पत्र के जारी होने के दो महीनों के भीतर विवाह किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ती हैं।
कैसा होता है विवाह समारोह -
विवाह का समारोह चर्च में मौजूद रजिस्टर में दर्ज किया जाता हैं। इसके साथ ही दो गवाहों, जाती मंत्री और नव विवाहित जोड़े की मौजूदगी में विवाह प्रमाण पत्र पर दस्तखत करके विवाह घोषित किया जाता हैं। क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद विवाह पूरी तरह कानूनी हो जाता हैं।
समारोह होता है शानदार -
शादी का मुख्य समारोह संगीत के साथ शुरू होता हैं। दोनों पक्ष संगीत की मधुर ध्वनि के साथ चर्च में प्रवेश करते हैं। जिसके बाद उन्हें 'वर्ड ऑफ गेटरिंग' दी जाती हैं, यह एक तरह का स्वागत समारोह हैं। जिसके बाद चर्च और फादर द्वारा आगंतुकों का स्वागत किया जाता हैं। दूल्हे और दुल्हन के लिए परमपिता परेमश्वर से आशीर्वाद मांगा जाता हैं। उनकी खुशियों की कामना की जाती हैं, इसके बाद मिनिस्टर द्वारा भगवान की विस्तृत प्रार्थना की जाती हैं।
इसके साथ ही, पवित्र ग्रंथ बाइबल से उद्धत की गई उत्तम पंक्तियां दूल्हे और दुल्हन के रिश्तेदारों और दोस्तों द्वारा गाई जाती हैं, इसके माध्यम से उनके लिए शुभकामना प्रेषित होती है। इसके बाद बाईबल से लिए गए प्रेरक प्रसंग सुनाए जाते हैं जिससे भावी पति -पत्नी प्रेरणा ले सके और उनका भविष्य सुंदर बने।
कसमों वादों का सिलसिला
मिनिस्टर दूल्हे और दुल्हन के इरादों और विवाह संस्था की पवित्रता के बारे में कसमें दिलवाता हैं। वह दूल्हे से पत्नी में विश्वास रखने और उसे सम्मान देने की बात कहता हैं, जिसके बदले में दूल्हा 'आई विल' कह कर अपनी सहमति देता हैं। इसके बाद मिनिस्टर दुल्हन से पति को सम्मान और प्रेम देने के साथ उसमें विश्वास रख कर विवाह की पवित्रता को बनाए रखने की सहमति मांगता हैं। 'आई विल' कहकर दुल्हन अपनी सहमति जताती हैं। इसके बाद मिनिस्टर परिजनों से विवाह के लिए सहमति मांगता हैं, वी डू कहकर अभिभावक इस महा मिलन के लिए सहमति देते हैं। शादी में आए मित्र गण भी यस वी डू कहकर पति पत्नी के इस नवनिर्मित रिश्ते को बनाए रखने में अपना सदैव सहयोग देने का वचन देते हैं।
वचनों का है ये बंधन
दुल्हन का दायां हाथ अपने दाएं हाथ में लेकर दूल्हा विवाह का वचन लेता हैं। 'मैं तुम्हे अपनी पत्नी मानता हूं और आजीवन सुख दुःख में तुम्हे प्रेम करने और तुम्हारे प्रति वफादार रहने का वचन देता हूं, कुछ ऐसी होती है दूल्हे राजा की शपथ। दुल्हनियां भी विधाता और मित्रों को साक्षी मानकर प्रेम, ईमानदारी और विश्वास के साथ सुख दुःख में अपने हमसफर का साथ निभाने का वादा करती हैं।
बदली अंगूठी, जुड़ें दिल
दुल्हन की अंगूठी मंत्री को दी जाती हैं, वह इसे दूल्हे को देता हैं। जिसे दुल्हा दुल्हन को पहनाता हैं। इस अंगूठी को प्रेम और समर्पण का टोकन माना जाता हैं। इसी तरह दुल्हन भी दूल्हे को रिंग पहनाती हैं। जिसके बाद होती हैं वेडिंग प्रेयर जिसे मिनिस्टर अंजाम देता हैं। इसके बाद मिनिस्टर इन दोनों को पति पत्नी घोषित कर देता हैं।
ईसा मसीह से नव दंपति के लिए आशीर्वाद मांग कर उन्हें प्रेम और विश्वास से एक दुसरे के साथ रहने की शुभकामना दी जाती हैं। इसके बाद मिनिस्टर दूल्हे को दुल्हन को चूमने के लिए कहता हैं, जिसके साथ विवाह पूर्ण माना जाता हैं।
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