Thursday, September 11, 2014

सोलह श्रृंगार। Wedding make up

किसी भी स्त्री को पूर्णता देता है, सोलह श्रृंगार। सोलह श्रृंगार करने के बाद स्त्री की खूबसूरती में चार चांद लग जाते है। शादी जिंदगी का सबसे यादगार दिन है, ऐसे में हर कोई इस दिन लगना चाहता है बेहद खास। हर दुल्हन करना चाहती है पिया के नाम पर सोलह श्रृंगार। आज आशिता दाधीच, बता रही है, सोलह श्रृंगार के नाम और प्रकार -

- बिंदी- सुहागिन स्त्रियां कुमकुम या सिंदूर से अपने ललाट पर लाल बिंदी लगाना जरूरी समझती हैं। इसे परिवार की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

- सिंदूर- उत्तर भारत में सिंदूर को स्त्रियों का सुहाग चिन्ह माना जाता है और विवाह के मौके पर पति अपनी पत्नी के मांग में सिंदूर भर कर जीवन भर उसका साथ निभाने का वचन देता है।

- मेहंदी- शादी के वक्त दुल्हन और शादी में शामिल होने वाली परिवार की सुहागिन स्त्रियां अपने पैरों और हाथों में मेहंदी रचाती है। मान्यता के मुताबिक वधू के हाथों में मेहंदी जितनी गाढ़ी रचती है, उसका पति उसे उतना ही प्यार करता है।

- शादी का जोड़ा- दुल्हन को जरी से बना हुआ शादी का लाल जोड़ा पहनाया जाता है। जिसमे घाघरा, चोली और ओढ़नी का समावेश होता है। देश के कुछ अंचलों में दुल्हन को पीली साड़ी पहनाई जाती है, महाराष्ट्र में हरी, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र में लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनाई जाती है।

- फूलों की वेणी - दुल्हन के जूड़े में जब तक सुगंधित फूल लगाए जाए उसका श्रृंगार फीका लगता है। दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में तो महिलाएं रोज फूलों का गजरा लगाती है, जबकि उत्तर भारत में फेरों के दौरान महिलाएं ढ़ीली वेणी गूंथ कर उसमे फूल पहनती है।

- मांग टीका- यह सर के बीच में पहना जाने वाला यह स्वर्ण आभूषण होता है। दुल्हन की मांग में इसी जगह सिंदूर भरा जाता है।

- नथनी - उत्तर भारतीय स्त्रियां आमतौर पर नाक के बायीं, जबकि दक्षिण भारत में नाक के दोनों ओर छोटी-सी नोज रिंग पहनी जाती है, जिसे बुलाक कहा जाता है। सुहागिन स्त्रियों के लिए नाक में आभूषण पहनना अनिर्वाय माना जाता है। इसलिए आम तौर पर स्त्रियां नाक में छोटी नोजपिन पहनती हैं, जो देखने में लौंग की आकार का होता है।

- कान की बालियां - शादी के दौरान कान में पहने वाले आभूषण को चेन के सहारे जुड़े में बांधा जाता है। शादी के बाद भी स्त्रियों का कानों में ईयरिंग्स पहनना जरूरी माना जाता है।

- हार- गले में पहना जाने वाला सोने या मोतियों का हार पति के प्रति सुहागन स्त्री के सुहाग का प्रतीक माना जाता है। दक्षिण और पश्चिम भारत में दुल्हा शादी के दौरान वधू के गले में मंगल सूत्र (काले रंग की बारीक मोतियों का हार जो सोने की चैन में गुंथा होता है) पहनाता है।

- बाजूबंद- यह आभूषण सोने या चांदी का होता है। यह बाहों में पूरी तरह कसा जाता है। इसलिए इसे बाजूबंद कहा जाता है। पहले सुहागिन स्त्रियों को हमेशा बाजूबंद पहने रहना अनिवार्य माना जाता था

- चूड़ियां- चूड़ियों में रंगों का विशेष महत्व है। नवविवाहिता के हाथों में लाल या हरी चूड़ियां ही पहनाई जाती है. इसके अलावा पीली या बंसती रंग की चूड़ियां पहनी जाती है।

- अंगूठी- शादी के पहले सगाई के रस्म में वर-वधू एक-दूसरे को अंगूठी पहनाते है. अंगूठी स्त्री के श्रृंगार की प्रतिक है. अंगूठी पहनने से हाथ की शोभा बढ़ जाती है.

- कमरबंद- कमरबंद कमर में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसे स्त्रियां विवाह के बाद पहनती हैं. सोने या चांदी से बने इस आभूषण के साथ बारीक घुंघरुओं वाली आकर्षक की रिंग लगी होती है, इसके अलावा सोने के भी कमरबंध खासे प्रचलित है.

- बिछुड़ी - पैरों के अंगूठे में रिंग की तरह पहने जाने वाले इस आभूषण को बिछुड़ी कहा जाता है। पैरों के अंगूठे और छोटी अंगुली को छोड़कर बीच की तीन अंगुलियों में चांदी का विछुआ पहना जाता है। इस आभूषण में तरह-तरह की सुंदर आकृतियां, जैसे मछली, मोर, तितली, फूल, पत्तियां आदि बनी होती हैं।

- पायल- पैरों में पहने जाने वाले आभूषण को पायल कहते है। इसमें घुंघरू लगे होते है। यह आभूषण हमेशा सिर्फ चांदी का ही होता है। पायल पहनने से जब स्त्री चलती है, तो उसके पैरों से आने वाली रुनझुन की आवाज से घर का माहौल मधुर लगता है।



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