शादियों के गीत, जिनके बिना अधूरी है शादियां
वे फिल्मे गाने जो बन गए शादियों की पहचान
संगीत के बिना हर जश्न अधूरा है, ऐसे में शादियों में तो संगीत और नाचने गाने का अपना ही महत्त्व है। शादी शब्द सुनते ही ना सिर्फ लेडीज संगीत बल्कि बरात के आगे झूम झूम कर नाचते लोगों की तस्वीर घूम जाती है। कब कब सजती है संगीत की यह महफिल और कौनसे होते है गीत बता रही है आशिता दाधीच।
शादियों में गीत संगीत की शुरुआत होती है गणपति स्थापना के साथ। गणेश स्थापना के दौरान कुछ गीत व भजन सभी समाजों और वर्गों में गाए जाते है। इनमें चालो रे विनायक आपा जोशी जी रे चाला, देवा हो देवा, गणपति राखों मेरी लाज, रनत भंवर से उतरो आज आदि शामिल हैं।
इसके बाद दूसरी बड़ी रस्म होती है मेहंदी की। पहले इस रस्म के दौरान घर की बड़ी -बुजुर्ग महिलाएं आपस में मिल जुल कर हंसी -ठिठौली करती थी। आधुनिक युग के साथ बन्ने-बन्नी के गीत की जगह इस रस्म में डीजे पर बजने वाले फिल्मी गीतों का बोलबाला हो गया है। रस्म के दौरान मेहंदी है रचने वाली, बन्नो रानी तुझे सयानी, मेहंदी से लिख के जैसे पॉप्युलर और पैपी गाने बजने लगे है।
इसके बाद नंबर आता है महिला संगीत का, जो पूरी तरह से नाच गाने पर ही आधारित कार्यक्रम होता है. यह कार्यक्रम विवाह समारोह का मुख्य आकर्षण होता है। इस दौरान जहां सहेलियां अलग अलग तरह के गीत चुनकर अपनी भावी दुल्हन सहेली को मंगलकामना देती है तो वही वरिष्ठ और ज्येष्ठ महिलाएं अपने डांस से कोई ना कोई सीख दुल्हन को दे जाती है. इस दौरान जहां भविष्य की मंगलकामना होती है तो वही हंसी ठिठौली भी और रिश्तेदारों से परिचय का भी जरिया है यह रस्म। इस समारोह में हर कोई संगीत की धुनों पर मस्ती में झूमता-गाता है, फिर चाहे वह समधी-समधन हो या फिर दूल्हा-दुल्हन।
जब दूल्हा बारात लेकर निकलता है तो हर कोई बस थम जाता है, दुल्हन के इस सौभाग्य की एक झलक देखने के लिए। बारात के आगे नाचते दूल्हे के दोस्त, झूमती भाभियां और दीदीयां बारात की शान होती है। बारात में बजने वाले गीतों में प्यारा भैया मेरा और आज मेरे यार की शादी है सबसे प्रमुख है।
बारात के दुल्हन के घर पहुंचने पर होता है जम कर स्वागत और मान मनुहार। इस दौरान दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है गीत खास डिमांड में रहता है। शादी की मुख्य रस्म फेरों में यूं तो मंत्रोच्चार की ध्वनि गुंजायमान रहती है, लेकिन, इसके साथ रिश्तेदार मग्न रहते है सदाबहार गीतों पर डांस करने में। इन गीतों में शामिल है राजा की आयेगी बारात रंगीली होगी रात मगन मै नाचूंगी, बहारो फूल बरसाओं मेरा महबूब आया है, दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है, मैं तो भूल चली बाबुल का देश पिया का घर प्यारा लगे, मेरी प्यारी बहनियां बनेगी दुल्हनियां जैसे गीत शामिल है। इस तरह किसी भी दुल्हन की विदाई मोहम्मद रफ़ी के गाए वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म नीलकमल के बेहद मार्मिक गीत था बाबुल की दुआये लेती जा तुझको सुखी संसार मिलेके बिना आज भी लगभग अधूरी सी लगती है।
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वे फिल्मे गाने जो बन गए शादियों की पहचान
संगीत के बिना हर जश्न अधूरा है, ऐसे में शादियों में तो संगीत और नाचने गाने का अपना ही महत्त्व है। शादी शब्द सुनते ही ना सिर्फ लेडीज संगीत बल्कि बरात के आगे झूम झूम कर नाचते लोगों की तस्वीर घूम जाती है। कब कब सजती है संगीत की यह महफिल और कौनसे होते है गीत बता रही है आशिता दाधीच।
शादियों में गीत संगीत की शुरुआत होती है गणपति स्थापना के साथ। गणेश स्थापना के दौरान कुछ गीत व भजन सभी समाजों और वर्गों में गाए जाते है। इनमें चालो रे विनायक आपा जोशी जी रे चाला, देवा हो देवा, गणपति राखों मेरी लाज, रनत भंवर से उतरो आज आदि शामिल हैं।
इसके बाद दूसरी बड़ी रस्म होती है मेहंदी की। पहले इस रस्म के दौरान घर की बड़ी -बुजुर्ग महिलाएं आपस में मिल जुल कर हंसी -ठिठौली करती थी। आधुनिक युग के साथ बन्ने-बन्नी के गीत की जगह इस रस्म में डीजे पर बजने वाले फिल्मी गीतों का बोलबाला हो गया है। रस्म के दौरान मेहंदी है रचने वाली, बन्नो रानी तुझे सयानी, मेहंदी से लिख के जैसे पॉप्युलर और पैपी गाने बजने लगे है।
इसके बाद नंबर आता है महिला संगीत का, जो पूरी तरह से नाच गाने पर ही आधारित कार्यक्रम होता है. यह कार्यक्रम विवाह समारोह का मुख्य आकर्षण होता है। इस दौरान जहां सहेलियां अलग अलग तरह के गीत चुनकर अपनी भावी दुल्हन सहेली को मंगलकामना देती है तो वही वरिष्ठ और ज्येष्ठ महिलाएं अपने डांस से कोई ना कोई सीख दुल्हन को दे जाती है. इस दौरान जहां भविष्य की मंगलकामना होती है तो वही हंसी ठिठौली भी और रिश्तेदारों से परिचय का भी जरिया है यह रस्म। इस समारोह में हर कोई संगीत की धुनों पर मस्ती में झूमता-गाता है, फिर चाहे वह समधी-समधन हो या फिर दूल्हा-दुल्हन।
जब दूल्हा बारात लेकर निकलता है तो हर कोई बस थम जाता है, दुल्हन के इस सौभाग्य की एक झलक देखने के लिए। बारात के आगे नाचते दूल्हे के दोस्त, झूमती भाभियां और दीदीयां बारात की शान होती है। बारात में बजने वाले गीतों में प्यारा भैया मेरा और आज मेरे यार की शादी है सबसे प्रमुख है।
बारात के दुल्हन के घर पहुंचने पर होता है जम कर स्वागत और मान मनुहार। इस दौरान दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है गीत खास डिमांड में रहता है। शादी की मुख्य रस्म फेरों में यूं तो मंत्रोच्चार की ध्वनि गुंजायमान रहती है, लेकिन, इसके साथ रिश्तेदार मग्न रहते है सदाबहार गीतों पर डांस करने में। इन गीतों में शामिल है राजा की आयेगी बारात रंगीली होगी रात मगन मै नाचूंगी, बहारो फूल बरसाओं मेरा महबूब आया है, दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है, मैं तो भूल चली बाबुल का देश पिया का घर प्यारा लगे, मेरी प्यारी बहनियां बनेगी दुल्हनियां जैसे गीत शामिल है। इस तरह किसी भी दुल्हन की विदाई मोहम्मद रफ़ी के गाए वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म नीलकमल के बेहद मार्मिक गीत था बाबुल की दुआये लेती जा तुझको सुखी संसार मिलेके बिना आज भी लगभग अधूरी सी लगती है।
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